आम तौर पर महाशिवरात्रि का व्रत हर माह आता है। जिसे हम मासिक शिवरात्रि कहते हैं लेकिन माघ के महिने कृष्ण पक्ष की चतुर्दषी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। महाशिव रात्रि 2022 में कब आयेगी (Mahashivratri
2023 mei kab aayegi) आइए जानते हैं। महाशिवरात्रि 2023 की तारीख व मुहूर्त प्रमुखतः ज्ञात होना चाहिए। हम जानते हैं कि महाशिवरात्रि का महत्व भारतीय त्यौंहारों में प्रमुख स्थान रखता है। भगवान षिव की आराधना एवं स्तुति इस दिन की जाती है और भक्त तन-मन-धन से इस त्यौंहार को हर्षोल्लास से मनाते हैं। Mahashivratri 2024 muhurt and date is also given in this article.
हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है. पंडित अरुणेश कुमार शर्मा के मुताबिक, महाशिवरात्रि की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 18 फरवरी 2023 को रात 08 बजकर 02 मिनट पर होगी और इसका समापन 19 फरवरी 2023 को शाम 04 बजकर 18 मिनट पर होगा.
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निशीथ काल पूजा मुहूर्त सुबह 12 बजकर 8 मिनट से लेकर 12 बजकर 58 मिनट तक जिसकी समय सीमा करीब 50 मिनट की रहेगी
महाशिवरात्रि पारणा मुहूर्त सुबह 6 बजकर 45 मिनट दिन 2 मार्च
चतुर्दर्शी तिथि प्रारम्भ & 1 मार्च 2022 को सुबह 3 बजकर 16 मिनट पर
चतुर्दर्शी तिथि समाप्त & 2 मार्च 2022 को सुबह 1 बजे
अब हम आपको बताते हैं कि महाशिवरात्रि कब और कैसे मनाया जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थदषी को यह पर्व मनाया जाता है। वहीं उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थशी को महाशिवरात्रि का आयोजन होता है। पूर्णिमान्त व अमावस्यान्त दोनों ही पंचांगों के अनुसार महाशिवरात्रि एक ही दिन पड़ती है इसलिए अंग्रेजी कैलेंडरर के अनुसार से पर्व की तारीख वही रहती है।
अभी आपने पढ़ा कि महाशिवरात्रि कब मनायी जाती है। आइये जानते हैं महाशिवरात्रि कैसे मनायी जाती है मिट्टी के लोटे या तांबे के लोटे में पानी या दूध भरकर शिवलिंग पर चावल बिल्व पत्र दूध और धतूरा चढ़ाते हैं। सर्वप्रथम बिल्व पत्र पर चंदन से तिलक करते हैं फिर भगवान शिव पर चढ़ाकर दूध और फिर जल से अभिषेक करते हैं। इसके पष्चात ऋतुफल जैसे गाजर बैर धतुरा फल केले आदि चढ़ाते हैं। भक्त अपने घर में कई तरह के पकवान बनाते हैं और लोग व्रत रखकर भगवान शिव की शिवरात्रि का त्यौंहार मनाया जाता है। शिव पुराण का पाठ और महामृत्युंजय मंत्र या शिव के पंचाक्षर मंत्र ऊँ नमः शिवाय का जाप इस दिन करना चाहिए। साथ ही इस दिन रात्रि जागरण का विधान है।
महाशिवरात्रि व्रत कब मनाया जाए इसके लिए शास्त्रों के अनुसार निम्न नियम तय किए गए हैं-
· चतुर्दशी के दूसरे दिन निशीथकाल के पहले हिस्से को छुए और पहले दिन पूरे निशीथ को व्याप्त करे, तो पहले दि नही महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है।
· चतुर्दशी के पहले दिन निशीथव्यापिनी हो तो उसी दिन महाशिवरात्रि मनाते हैं। रात्रि का आठवां मुहूर्त निशीथ काल कहलाता है। सरल शब्दों में कहें तो जब चतुर्दशी तिथि शुरू हो और रात का आठवां मुहूर्त चतुर्दशी तिथि में ही पड़ रहा हो तो उसी दिन शिवरात्रि मनानी चाहिए।
माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात ही भगवान षिव करोड़ों सूर्यों के समान प्रभाव वाले ज्योर्तिलिंग रूप के रूप मंे प्रकट हुए थे। इसके बाद से हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि का त्यौंहार मनाया जाता है।
शिवरात्रि को लेकर बहुत सारी कथाएँ प्रचलित हैं। विवरण मिलता है कि भगवती पार्वती ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए घनघोर तपस्या की थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसके फलस्वरूप फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। यही कारण है कि महाशिवरात्रि को अत्यन्त महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है।
वहीं गरुड़ पुराण में इस दिन के महत्व को लेकर एक अन्य कथा कही गई हैए जिसके अनुसार इस दिन एक निषादराज अपने कुत्ते के साथ शिकार खेलने गया किन्तु उसे कोई शिकार नहीं मिला। वह थककर भूख प्यास से परेशान हो एक तालाब के किनारे गयाए जहाँ बिल्व वृक्ष के नीचे शिवलिंग था। अपने शरीर को आराम देने के लिए उसने कुछ बिल्व.पत्र तोड़ेए जो शिवलिंग पर भी गिर गए। अपने पैरों को साफ़ करने के लिए उसने उनपर तालाब का जल छिड़काए जिसकी कुछ बून्दें शिवलिंग पर भी जा गिरीं। ऐसा करते समय उसका एक तीर नीचे गिर गयाय जिसे उठाने के लिए वह शिव लिंग के सामने नीचे को झुका। इस तरह शिवरात्रि के दिन शिव पूजन की पूरी प्रक्रिया उसने अनजाने में ही पूरी कर ली। मृत्यु के बाद जब यमदूत उसे लेने आएए तो शिव के गणों ने उसकी रक्षा की और उन्हें भगा दिया।
जब अज्ञानतावश महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर की पूजा का इतना अद्भुत फल हैए तो समझ बूझ कर देवाधिदेव महादेव का पूजन कितना अधिक फलदायी होगा।
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